भारत और नेपाल में पूजे जाने वाले भगवान शिव के अनगिनत रूपों में पशुपतिनाथ का एक अनोखा और गहरा आध्यात्मिक महत्व है। नेपाल के काठमांडू में पवित्र बागमती नदी के किनारे स्थित पशुपतिनाथ मंदिर न केवल शिव के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, बल्कि उन चुनिंदा जगहों में से भी एक है
सृष्टि के प्रारंभ में जब देवी सरस्वती प्रकट हुईं, तो देवी ने अपनी वीणा की ध्वनि से ब्रह्मांड में ध्वनि उत्पन्न की। लेकिन इस ध्वनि में न तो राग था और न ही संगीत। सृष्टि के आरंभ से ही आनंदमय शिव ने जैसे ही 14 बार डमरू बजाकर नृत्य करना शुरू किया, तभी उनके डमरू
देवो के देव महादेव (Mahadev) भगवान शिव और सती (Mata Parvati) का अद्भुत प्रेम शास्त्रों में वर्णित है। इसका प्रमाण है सती के यज्ञ कुण्ड में कूदकर आत्मदाह करना और सती के शव को उठाए क्रोधित शिव का तांडव करना। हालांकि यह भी शिव की लीला थी क्योंकि इस बहाने शिव 51 शक्ति पीठों की
भगवान शिव की पूजा सदियों से होती आ रही है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शिव का एक और रूप है जो अर्धनारीश्वर है। भगवान शंकर के अर्धनारीश्वर अवतार में हम देखते हैं कि भगवान शंकर का आधा शरीर स्त्री का और आधा शरीर पुरुष का है। वह इस रूप के माध्यम से