ज्ञानवापी-शृंगार गौरी मामले में फैसला सुरक्षित, 12 मई को फैसला

वाराणसी: काशी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी (Kashi Vishwanath Dham – Gyanvapi) स्थित मां श्रृंगार गौरी (Maa Shringar Gauri) और अन्य देव विग्रहों के सर्वे के मामले में तीन दिनों से चल रही सभी पक्षों की बहस बुधवार को पूरी हो गई। दो घंटे तक चली दोनों पक्षों की बहस को सुनने के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। जिसे 12 मई को सुनाया जाएगा।

इस प्रकरण में वादी व प्रतिवादी पक्ष की ओर से अदालत में दो अलग-अलग प्रार्थना पत्र दिए गए हैं। वादी पक्ष की ओर से बैरिकेडिंग के अंदर तहखाने समेत अन्य उल्लेखित स्थलों के निरीक्षण का स्पष्ट आदेश देने की की मांग की गई है। प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से एडवोकेट कमिश्नर पर निष्पक्ष न होने का आरोप लगाते हुए उन्हें बदलने की मांग अदालत से की गई है।

सुनवाई के दौरान बुधवार को ताला तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर जाकर वीडियोग्राफी और सर्वे की मांग का अंजुमन इंतजामिया की तरफ से विरोध किया गया। अधिवक्ता अभयनाथ यादव ने कहा कि वर्ष 1936 में दीन मोहम्मद बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट में यह घोषित किया जा चुका है कि मस्जिद, कोर्ट यार्ड और उसके नीचे की भूमि वक्फ बोर्ड की है।

यहां मुस्लिम समुदाय के लोग धर्म के अनुसार नमाज, प्रार्थना, उर्स आदि करने के अधिकारी हैं, जो अनादिकाल से बिना किसी अवरोध के होता चला आ रहा है। ऐसे में ज्ञानवापी तहखाने के अंदर ताला तोड़कर सर्वे किए जाने का आवेदन खारिज होने योग्य है। आराजी नंबर की चौहद्दी, एरिया स्पष्ट होने के बाद ही सर्वे की बात कही गई।

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