यहां प्राकृतिक रूप से एलर्जी से छुटकारा पाने का तरीका बताया गया है: आयुर्वेदिक उपचार प्रभावी हो सकते हैं

अनमोल कुमार एलर्जी (Allergies) एक आम शब्द , जिसका प्रयोग हम कभी’ किसी ख़ास व्यक्ति से मुझे एलर्जी है ‘ के रूप में करते हैं। ऐसे ही हमारा शरीर भी ख़ास रसायन उद्दीपकों के प्रति अपनी असहज प्रतिक्रया को ‘ एलर्जी के रूप में दर्शाता है।

एलर्जी (Allergies) एक आम शब्द , जिसका प्रयोग हम कभी’ किसी ख़ास व्यक्ति से मुझे एलर्जी है ‘ के रूप में करते हैं। ऐसे ही हमारा शरीर भी ख़ास रसायन उद्दीपकों के प्रति अपनी असहज प्रतिक्रया को ‘ एलर्जी के रूप में दर्शाता है।

बारिश के बाद आयी धूप तो ऐसे रोगियों की स्थिति को और भी दूभर कर देती है. ऐसे लोगों को अक्सर अपने चेहरे पर रूमाल लगाए देखा जा सकता है। क्या करें छींक के मारे बुरा हाल जो हो जाता है।

हालांकि एलर्जी के कारणों को जानना कठिन होता है, परन्तु कुछ आयुर्वेदिक उपाय इसे दूर करने में कारगर हो सकते हैं। आप इन्हें अपनाएं और एलर्जी से निजात पाएं!

गुनगुने निम्बू पानी का प्रातःकाल नियमित प्रयोग शरीर में विटामिन – सी की मात्रा की पूर्ति कर एलर्जी के कारण होने वाले नजला – जुखाम जैसे लक्षणों को दूर करता है।

अदरक, काली मिर्च , तुलसी के चार पत्ते, लौंग एवं मिश्री को मिलाकर बनायी गयी’ हर्बल चाय ‘ एलर्जी से निजात दिलाती है।

बरसात के मौसम में होनेवाले विषाणु (वायरस) संक्रमण के कारण ‘ फ्लू ‘ जनित लक्षणों को नियमित ताजे चार नीम के पत्तों को चबा कर दूर किया जा सकता है।

आयुर्वेदिक दवाई’ सितोपलादि चूर्ण’ एलर्जी के रोगियों में चमत्कारिक प्रभाव दर्शाती है।

नमक पानी से ‘कुंजल क्रिया ‘ एवं ‘ नेती क्रिया ” कफ दोष को बाहर निकालकर पुराने से पुराने एलर्जी को दूर कने में मददगार होती है।

पंचकर्म की प्रक्रिया’ नस्य ‘ का चिकित्सक के परामर्श से प्रयोग ‘ एलर्जी’ से बचाव ही नहीं इसकी सफल चिकित्सा है।

प्राणायाम में ‘कपालभाती’ का नियमित प्रयोग एलर्जी से मुक्ति का सरल उपाय है।

धूल, धुआं एवं फूलों के परागकण आदि के संपर्क से बचाव।

अत्यधिक ठंडी एवं गर्म चीजों के सेवन से बचना चाहिए।

कुछ आधुनिक दवाओं जैसे – एस्पिरीन, निमासूलाइड आदि का सेवन सावधानी से करना चाहिए।

खटाई एवं अचार के नियमित सेवन से बचना चाहिए।

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