भगवान गणेश के 12 अद्भुत स्वरूप, जिनकी पूजा करने से मिलते हैं अनेक लाभ

हिन्दू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूजनीय माना जाता है!!

कोई इन्हें विघ्नहर्ता कहता है तो कोई इन्हें सिद्धिविनायक। भगवान गणेश के भक्त इन्हें अलग-अलग नामों से जानते हैं और उनके अलग-अलग स्वरूप की पूजा करते हैं। आज के दौर में गणेश जी के भक्तों की संख्या बहुत बड़ी है। देश–विदेश के भिन्न-भिन्न जगहों पर भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूपों की अराधना करते हैं। लेकिन गणेश चतुर्थी एक ऐसा त्यौहार है, जिसे कोने-कोने में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

हिन्दू धर्म के अनुसार कोई भी नया काम शुरू करना हो, घर में विवाह हो, या फिर दिनचर्या का आरंभ ही क्यों ना करना हो…. सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती है। भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा गया है इसलिए यह मान्यता है कि गणेश जी को सर्वप्रथम पूजने से वह कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण होता है। घर हो या कोई मंदिर, जब भी पूजा आरंभ होती हैं तो सबसे पहले भगवान गणेश का ही नाम लिया जाता है।

भगवान गणेश के 12 स्वरूप
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश के 12 ऐसे स्वरूप हैं जिनके ध्यान करने से इंसानी जीवन की बड़ी-बड़ी मुश्किलें हल हो जाती हैं। लेकिन किस उद्देश्य या किस समस्या के लिए आपको श्रीगणेश के किस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए, ये तथ्य जानें …………

  1. महागणेश
    श्रीगणेश के इस स्वरूप की पूजा करने से जीवन में आने वाली हर परेशानी का समाधान होता है। यह आपको सफलता भी दिलवाता है और जीवन के हर पड़ाव पर आपकी सहायता भी करता है।
  2. द्विज गणपति
    द्विज गणेश की पूजा करने से आपको अच्छा स्वास्थ्य और सुखद भविष्य मिलता है। द्विज गणेश के स्वरूप की व्याख्या की जाए तो उनके दो सिर और चार हाथ होते हैं। एक हाथ में उन्होंने माला, एक में मटकी, एक में किताब और एक में छड़ी पकड़ी है।
  3. हेरंब गणपति
    हेरंब गणपति आपके धन और संपत्ति की रक्षा करते हैं। वे शेर पर सवार रहते हैं और इनके पांच सिर और दस हाथ होते हैं।
  1. वीर गणपति
    यह गणेश जी के पराक्रमी स्वरूप का नाम है, जिन्होंने अपनी सोलह भुजाओं में सोलह भिन्न-भिन्न प्रकार के हथियार लिए हैं। वीर गणपति महिलाओं को बीमारियों से बचाते हैं।
  2. करपग विनायगर
    अर्ध पद्मासन में बैठे दो हाथ वाले ये गणपति आपकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं और आपके ऊपर धन की वर्षा करते हैं।
  3. गणेशनी
    हमारी मार्ग में आने वाली हर बाधा, हर परेशानी और हर बीमारी को दूर करते हैं ये गणपति। ये आपके द्पोष और पाप में संतुलन बनाते हैं और आपके जीवन में केवल अच्छे संबंधों के आने का ही मार्ग खोलते हैं।
  4. नरमुग गणपति
    अधि-विनायक, भगवान गणेश के प्राचीनतम स्वरूप हैं। इनका सिर हाथी का नहीं वरन एक मनुष्य का ही है।
  5. सिद्धि-बुद्धि गणपति
    भगवान गणेश अपने इस स्वरूप में अपनी दोनों पत्नियों के साथ विराजमान हैं। सिद्धि हमें सहजज्ञान प्रदान करती हैं और बुद्धि हमें व्यवहारिक ज्ञान की प्राप्ति करवाती हैं।
  6. नृत्य गणपति
    मनोकामना पूर्ति करने वाले वृक्ष के नीचे नृत्य करते भगवान गणेश जी हमें खुशहाली और पूर्वजों का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
  7. विघ्नहर्ता
    आठ हाथों वाले गणेश जी के इस स्वरूप की पूजा करने से आपकी हर समस्या और हर रुकावट का समाधान होता है।
  8. समस्या
    अपने इस स्वरूप में भगवान गणेश कलियुग के उन लोगों की सहायता करते हैं जो अपने अच्छे कर्मों के बावजूद, समस्याओं को झेल रहे हैं।
  9. अलिंग नर्तन गणपति
    अपने इस स्वरूप में भगवान गणेश कलिंग नामक सांप के फन के ऊपर नृत्य कर रहे हैं। यह बुराई पर अच्छाई की जीत दर्शाता हैं।

भगवान गणेश जी की प्रतिमा से इस तरह करें वास्तु दोष का निवारण

वास्तुशास्त्र के दोष दूर करने के लिहाज से भगवान गणेश की प्रतिमा बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकती है। नए घर में प्रवेश से लेकर उसमें रहते हुए आप कई तरह से गणेशजी की प्रतिमा का इस्तेमाल कर सकते है। यदि किसी भवन का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में खुलता हो तो उस द्वार की चौखट के ऊपर, बाहर व भीतरी हिस्से में गणेश जी की छोटी सी प्रतिमा लगाने से भवन का दक्षिण मुखी दोष समाप्त हो जाता है। 

अगर भवन में प्रवेश करने पर आपको किसी अनजानी नकारात्मकता का बोध होता हो तो घर के भीतर बिल्कुल सामने की ओर मुख्य द्वार की ओर देखती हुई भगवान गणेश की नौ इंच की प्रतिमा लगाई जा सकती है। हर शुभ अवसर पर ऑफिस, फैक्ट्री या दुकान में श्री गणेश जी के प्रतिरूप अर्थात स्वास्तिक के चिह्ल को ताम्रपत्र या पूजा की थाली पर अंकित करके उसकी पूजा करें तो व्यापार में सहायक सिद्ध होता है। 


भवन की हर दिशा में भगवान श्रीगणेश कि प्रतिमा नहीं लगाना चाहिए। बल्कि सामान्यतया इस मूर्ति या फोटो को कुछ इस प्रकार रखें कि इन्हें नमन करते समय हमारा मुख सदा पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर हो। अर्थात ऐसे में श्रीगणेश जी की तस्वीर या मूर्ति का मुख स्वत: ही दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की ओर होगा।

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