सनातन धर्म में किसी भी पूजा के वक्त एक श्लोक बोला जाता है- वह है अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमानश्च विभीषण:। कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥ सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।। अर्थात् अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सभी चिरंजीवी हैं, इन्हें नमस्कार है। यह दुनिया का एक आश्चर्य है। सनातन धर्म में
संभवत: कम ही लोगों को यह जानकारी होगी कि हनुमानजी के कितने भाई थे। उनमें से भी सगे भाई कितने थे। यदि भाई थे तो हनुमानजी सबसे छोटे थे या कि बड़े? वैसे तो रामभक्त हनुमानजी की कीर्ति रामचरितमानस में मिलती है। संभवत: कम ही लोगों को यह जानकारी होगी कि हनुमानजी के कितने भाई
प्रथम पूज्य देव भगवान श्री गणेश को विघ्नविनाशक माना जाता है। सप्ताह में इनका दिन बुधवार माना गया है। वहीं ज्योतिष के अनुसार ये बुध ग्रह के कारक देव हैं, जो बुद्धि के देवता हैं। प्रथम पूज्य देव भगवान श्री गणेश को विघ्नविनाशक माना जाता है। सप्ताह में इनका दिन बुधवार माना गया है। वहीं
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस साल यह त्यौहार 5 फ़रवरी के दिन पड़ रहा है। इस दिन से ऋतुराज बसंत की शुरुआत हो जाती है। बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू पंचांग
ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा यानी आधी रात के वक्त भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। वातावरण सहित घूमती धरती या सारे अनन्त ब्रह्माण्ड का अक्स ही लिंग है। इसलिए इसका आदि और अंत भी साधारण जनों की क्या बिसात, देवताओं के लिए भी अज्ञात, अनन्त या नेति-नेति है।
माघ अमावस्या- 31 जनवरी 2022 सोमवार को सोमवती और 1 फरवरी 2022 मंगलवार को मौनी अमावस्या है। पूर्णिमा के दिन चंद्र पूर्ण होता है और अमावस्या के दिन चंद्र लुप्त रहता है। शुक्ल पक्ष के 15वें दिन पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष के 15वें दिन अमावस्या होती है। माघ अमावस्या- 31 जनवरी 2022 सोमवार को सोमवती
अल्जाइमर रोग एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है जो 60 के दशक के मध्य में शुरू होती है जिससे याददाश्त और सोचने की क्षमता में गिरावट आती है। यह डिमेंशिया के 60 से 70% मामलों के लिए जिम्मेदार है। अल्जाइमर रोग की शुरुआत के साथ जीवन समय के साथ सोचने, तर्क करने, याद रखने और व्यवहार
माउंट आबू (mount abu) में अचलगढ़ दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है, जहां भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के अंगूठे की पूजा होती है। मंदिर में भगवान शिव के अंगूठे के निशान देखे जा सकते हैं। माउंटआबू को अर्धकाशी (Ardhkashi) भी कहा गया है। माउंट आबू (mount abu) में अचलगढ़ दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है,
शास्त्रों के अनुसार इस धरती पर 14 प्रकार के दुर्गुण जिन लोगों में हैं उन्हें मृत व्यक्ति के समान माना गया है। लंका काण्ड में रावण-अंगद संवाद में अंगल द्वारा कहा गया है कि सिर्फ सांस लेने वालों को जीवित नहीं कहते – सांस तो एक जानवर भी लेता है। शास्त्रों के अनुसार इस धरती
अनमोल कुमार छंटे हुए तेज से विष्णु का सुदर्शन चक्र, अमोघ यमदंड, शंकर का त्रिशूल, काल का खड्ग, कार्तिकेय को शक्ति और दुर्गा के शूल बनाए गए आज के समय में ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) की गर्माहट भरी खबरों के बीच यह मानना कठिन हो सकता है कि सृष्टि के आरंभ में सूर्य की किरणें