आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक किसे माना जाता है?

हालांकि AI को 2018 में OpenAI के आने के बाद लोकप्रियता मिली, लेकिन इसकी शुरुआत 1920 के दशक में ही हो गई थी। 1920 में रखी गई नींव से लेकर 1956 में AI के सामने आने तक – जिसने आज की तकनीक का आधार तैयार किया – AI के इतिहास को कई दौर में बांटा जा सकता है।

अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक जॉन मैकार्थी को “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक” माना जाता है। उनके बेहतरीन काम ने AI के विकास की नींव रखी और इसे कंप्यूटर साइंस के एक अलग क्षेत्र के रूप में स्थापित किया।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक ऐसी तकनीक है जो कंप्यूटर को इंसानों की तरह सोचने और समस्याओं को हल करने की क्षमता देती है – चाहे वे अकेले काम करें या दूसरी तकनीकों के साथ मिलकर।

इसकी शुरुआत 1900 के दशक की शुरुआत में हुई, जब कृत्रिम इंसानों का विचार पहली बार सामने आया और शोधकर्ताओं ने सोचना शुरू किया कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – या जिसे वे “कृत्रिम दिमाग” कहते थे – बनाना संभव है।

“कृत्रिम लोग” (artificial people) शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 1921 में चेक नाटककार कारेल कापेक ने “रॉसम्स यूनिवर्सल रोबोट्स” नाम के एक साइंस-फिक्शन नाटक में किया था, जिसमें रोबोट के लिए कृत्रिम लोगों की अवधारणा पेश की गई थी।

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जॉन मैकार्थी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक क्यों माना जाता है?

जॉन मैकार्थी को “AI का जनक” कहा जाता है क्योंकि उन्होंने इस क्षेत्र में अहम योगदान दिया:

1955 में, उन्होंने पहली बार “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” शब्द का इस्तेमाल किया और इस क्षेत्र को एक औपचारिक पहचान दी।

1956 में, मैकार्थी ने मार्विन मिंस्की, क्लाउड शैनन और नथानिएल रोचेस्टर के साथ मिलकर ऐतिहासिक डार्टमाउथ कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसे एक विषय के तौर पर AI की आधिकारिक शुरुआत माना जाता है।

उन्होंने LISP प्रोग्रामिंग भाषा विकसित की, जो दशकों तक AI रिसर्च में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा बनी रही।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जनक

जॉन मैकार्थी (1927–2011) कंप्यूटर साइंस के इतिहास के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिकों में से एक थे। अमेरिका के बोस्टन में जन्मे मैकार्थी ने न केवल AI, बल्कि गणित और कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भी अहम योगदान दिया। उनका यह मानना ​​कि कंप्यूटर इंसानी सोच की नकल कर सकते हैं, तकनीक के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल गया।

उन्होंने अपने करियर का एक बड़ा हिस्सा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर बिताया और कंप्यूटर वैज्ञानिकों की कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया। मैकार्थी ने MIT में भी काम किया और शुरुआती ‘टाइमशेयरिंग सिस्टम’ (timesharing systems) को विकसित करने में योगदान दिया, जिससे कंप्यूटिंग आम लोगों के लिए अधिक सुलभ हो गई।

योगदान

उन्होंने कॉमन-सेंस रीजनिंग (सामान्य समझ पर आधारित तर्क), मशीन लर्निंग और ज्ञान के लॉजिकल रिप्रेजेंटेशन (तार्किक प्रस्तुतीकरण) जैसे विचार पेश किए।

अपनी दूरदर्शी सोच के कारण जॉन मैकार्थी की तुलना अक्सर अपने समय के महान आविष्कारकों से की जाती है। उनके विचारों ने अनगिनत शोधकर्ताओं को प्रेरित किया और उन्हें AI के क्षेत्र में एक केंद्रीय हस्ती बना दिया।

जॉन मैकार्थी का योगदान आज भी आधुनिक AI को प्रभावित कर रहा है – चाहे वह नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग हो, रोबोटिक्स हो या मशीन लर्निंग। उन्हें AI के क्षेत्र में उनके काम के लिए कई सम्मान मिले, जिनमें ट्यूरिंग अवार्ड (1971) भी शामिल है। आज वॉयस असिस्टेंट, ऑटोनॉमस व्हीकल (बिना ड्राइवर वाली गाड़ियां) और स्मार्ट सिस्टम में AI का जो इस्तेमाल हो रहा है, वह सब उसी सपने का हिस्सा है जिसकी कल्पना सबसे पहले मैकार्थी ने की थी।

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