31/10/2021
झूठः दिल को छू लेने वाली एक युवा ब्राह्मण की कथा!

चेष्टा करने पर भी हंसी को रोक न सकी। भुवनेश्वर की चंचल पुत्रवधू घूंघट की आड़ से उस नवीन पुरोहित को देखती जाती और होम-कुण्ड की आग को पंखे से तेज करती जाती थी। पति ने आंखें दिखायीं। वधू ने मुंह तो अवश्य ही फेर लिया, किन्तु हंसी न रोक सकी। शायद उसके लिए असाध्य