भगवान राम ने सीता जी के स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र जी के आदेश पर भगवान शिव के कठोर धनुष को तोड़कर सीता जी से विवाह किया था। लेकिन शिव का वह धनुष किसने बनाया और वह शिव धनुष महाराज जनक जी तक किसके द्वारा और कैसे पहुंचा, यह रहस्य बहुत कम लोग जानते हैं। पिनाका
भगवान गणेश के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले में एक अनूठा मंदिर है। यह गणेश मंदिर देश के अन्य मंदिरों से काफी अलग है। यहां विराजमान गणेश प्रतिमा नरमुखी गणेश मंदिर है। यह दुनिया का इकलौता मंदिर है, जहां देश-विदेश से लोग आते हैं। यह मंदिर तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले के
देवो के देव महादेव (Mahadev) भगवान शिव और सती (Mata Parvati) का अद्भुत प्रेम शास्त्रों में वर्णित है। इसका प्रमाण है सती के यज्ञ कुण्ड में कूदकर आत्मदाह करना और सती के शव को उठाए क्रोधित शिव का तांडव करना। हालांकि यह भी शिव की लीला थी क्योंकि इस बहाने शिव 51 शक्ति पीठों की
शनिवार यानी न्याय के देवता शनिदेव (Shanidev) का दिन है। शास्त्रों में शनिदेव को न्याय का देवता कहा गया है। नाराज होने से राजा को रंक बना देते हैं तो खुश होने पर भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करना आसान नहीं हैं। लेकिन सच्ची निष्ठा और पवित्र ह्रदय से किए गए काम
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है, जिससे हर तरह की बाधा और विघ्न दूर हो जाते हैं। वे भक्तों के कष्ट, दरिद्रता और रोगों को दूर करते हैं। यह तो सभी जानते हैं कि गणेश जी भगवान शिव और मां पार्वती के पुत्र
हाल के साहित्यिक इतिहास में सबसे विवादास्पद पुस्तकों में से एक, सलमान रुश्दी की द सैटेनिक वर्सेज, तीन दशक पहले प्रकाशित हुई थी और लगभग तुरंत ही पूरी दुनिया में आक्रोश फैल गया, उनमें से कुछ हिंसक हो गईं। एक साल बाद, 1989 में, ईरान के सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला खुमैनी ने एक फतवा, या धार्मिक
अरण्य वन का उल्लेख द्वापर युग के महाभारत काल में मिलता है, जहां पांडवों और कौरवों के गुरु द्रोणाचार्य रहते थे। यहां एक शिवलिंग की स्थापना गुरु द्रोणाचार्य ने की थी। यहीं पर द्रोणाचार्य अपने अमर पुत्र अश्वत्थामा के गुप्त हथियारों का ज्ञान देते थे। यह स्थान उत्तर प्रदेश के कानपुर, बांका छतरपुर, शिवराजपुर के
धार्मिक मान्यताओं में दण्ड के अधिकारी माने जाने वाले शनि देव के बारे में कहा जाता है कि जो भी शनि की तिरछी दृष्टि कर लेता है वह उसके प्रकोप से बच नहीं पाता है। स्वयं देवाधिदेव महादेव भी उनके प्रकोप से नहीं बच सके। आइए जानते हैं क्या है शनि देव और महादेव की
हरिद्वार। 02 अगस्त, 2022। पारंपरिक भारतीय चिकित्सा का आधुनिकीकरण: ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य और औद्योगिक परिप्रेक्ष्य’ पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन, श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी और श्रेया आचार्य बालकृष्ण जी के मार्गदर्शन में ज्ञान-अनुसंधान का निरंतर प्रवाह जारी रहा। चिकित्सा के विभिन्न उपयोगों पर सार व्याख्यान दिए गए। पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव जी ने
भगवान के हरिहर स्वरूप का क्या है रहस्य? क्या है भगवान के ‘हरिहर अवतार’ का प्रसंग? शैव और वैष्णवों में आपसी मतभेद मिटाने के लिए भगवान शिव और विष्णु ने किस तरह लीला कर संसार को संदेश दिया कि परमात्मा एक ही है, चाहे किसी भी मार्ग से उसकी उपासना की जाए। वेदों में कहा